मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड: सौरभ राजपूत केस की जांच करने वाले IPS आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन क्यों आए चर्चा में?
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। पति की हत्या, शव के टुकड़े करना और उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने की घटना ने लोगों को हैरान कर दिया था। इस चर्चित मामले की जांच और उससे जुड़े खुलासों के दौरान दो युवा आईपीएस अधिकारी आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन भी चर्चा में आए। दोनों अधिकारियों की भूमिका ने इस मामले की जांच को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
यह मामला केवल अपराध की भयावहता के कारण ही सुर्खियों में नहीं रहा, बल्कि पुलिस जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों और अदालत में पेश किए गए तथ्यों के कारण भी चर्चा का विषय बना। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और आरोपियों के खिलाफ विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया।
कौन हैं IPS आयुष विक्रम सिंह?
आयुष विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 29 अक्टूबर 1992 को हुआ था और वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की जांच के संदर्भ में उनका नाम सामने आने के बाद उनकी पेशेवर भूमिका और पुलिस सेवा से जुड़े विवरण चर्चा में आए। इस तरह के संवेदनशील मामलों में जांच अधिकारियों की जिम्मेदारी घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने, साक्ष्य जुटाने और मामले को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की होती है।
अंतरिक्ष जैन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े अहम तथ्य बताए
अंतरिक्ष जैन उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। मेरठ में तैनाती के दौरान उन्होंने मामले से जुड़े फोरेंसिक और पोस्टमार्टम निष्कर्षों की जानकारी साझा की थी।
जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों ने पुलिस को घटना की प्रकृति समझने में मदद की। रिपोर्ट में शरीर पर चाकू से चोट के निशान और गर्दन तथा कलाई अलग किए जाने से संबंधित तथ्य सामने आए थे। पुलिस ने इन जानकारियों को जांच के अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां स्थापित करने का प्रयास किया। <Cite refs={[“turn181651news0”]}/>
क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड?
सौरभ राजपूत मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में रहते थे और मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे। वह 24 फरवरी 2025 को विदेश से मेरठ लौटे थे। पुलिस जांच के मुताबिक, मार्च 2025 में उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद उनके शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया।
मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य जांच के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया। <
करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल
जांच पूरी करने के बाद मेरठ पुलिस ने मई 2025 में लगभग एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य शामिल किए गए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए।
अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। <
अदालत के फैसले के बाद फिर चर्चा में आया मामला
सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया। इस पूरे घटनाक्रम में जहां अपराध की गंभीरता और अदालत के फैसले ने लोगों का ध्यान खींचा, वहीं जांच से जुड़े युवा आईपीएस अधिकारियों आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी।
दोनों अधिकारियों ने जांच के दौरान अलग-अलग पहलुओं से जुड़े तथ्यों को सामने लाने में भूमिका निभाई। यह मामला पुलिस जांच में साक्ष्य जुटाने, फोरेंसिक तथ्यों के महत्व और अदालत में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री की अहमियत को भी रेखांकित करता है।

