जनजातीय गौरव दिवस 2026: उत्तराखंड में 1 से 18 नवंबर तक होंगे भव्य आयोजन, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर विशेष कार्यक्रम
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक, जनजातीय संस्कृति, कला, विरासत और महान नायकों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश
देहरादून, 23 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस 2026 को व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रदेशभर में 1 नवंबर से 18 नवंबर 2026 तक जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षिक और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रमों की तैयारियों और रूपरेखा को लेकर उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री खजान दास ने समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने भारत सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार प्रदेशभर में जनजातीय गौरव दिवस के आयोजनों को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के निर्देश दिए।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन संघर्ष, साहस, राष्ट्रभक्ति और जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पण का प्रतीक है। उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को सम्मान देना इन कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है।
15 नवंबर को आयोजित होगा मुख्य जनजातीय गौरव दिवस समारोह
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को प्रदेश में एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाए।
उन्होंने बताया कि इस मुख्य समारोह में जनजातीय गौरव दिवस के महत्व, भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक योगदान और जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्य कार्यक्रम के आयोजन स्थल का चयन बाद में किया जाएगा। मंत्री ने अधिकारियों से कार्यक्रम की तैयारियां समय रहते पूरी करने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने निर्देश दिए कि जनजातीय क्षेत्रों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोजन केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर व्यापक जनजागरूकता का माध्यम बन सकें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वर्ष 2021 में की थी घोषणा
जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में महान स्वतंत्रता सेनानी और जनजातीय नायक भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
इस निर्णय का उद्देश्य देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना और उनके इतिहास, संस्कृति तथा परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
भगवान बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। उनका आंदोलन जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों तथा सामाजिक न्याय की मांग से जुड़ा रहा।
उनका जीवन आज भी संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना की प्रेरणा देता है।
1 से 18 नवंबर तक प्रदेशभर में होंगे विभिन्न कार्यक्रम
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने बताया कि प्रदेश में 1 नवंबर से 18 नवंबर तक जनजातीय गौरव दिवस के अंतर्गत अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।
इन कार्यक्रमों में जनजातीय विरासत, कला, संस्कृति, इतिहास और महान जनजातीय नायकों के योगदान को प्रमुख स्थान दिया जाएगा।
कार्यक्रमों के अंतर्गत जनजातीय समाज की पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य और शिल्प से संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं, प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और सामुदायिक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जनजातीय समाज की उपलब्धियों तथा सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराया जाएगा।
जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत पर लगेंगी प्रदर्शनियां
जनजातीय गौरव दिवस के अंतर्गत प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा।
इन प्रदर्शनियों में जनजातीय समाज की ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली, महान जनजातीय नायकों का योगदान और जनजातीय समुदायों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और संबंधित मंत्रालय द्वारा किए गए सुधारों की जानकारी भी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाएगी।
प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों को जनजातीय समाज के इतिहास, सांस्कृतिक विविधता और विकास से जुड़े प्रयासों की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।
नृत्य, संगीत और पारंपरिक शिल्प कला को मिलेगा मंच
कार्यक्रमों के दौरान जनजातीय नृत्य, संगीत, पारंपरिक कला और शिल्प से संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
इन आयोजनों का उद्देश्य जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
जनजातीय कला और शिल्प पर कार्यशालाओं के आयोजन से स्थानीय कलाकारों तथा प्रतिभागियों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
पारंपरिक कला-शिल्प की प्रदर्शनियों के माध्यम से जनजातीय समुदायों की रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता को सामने लाया जाएगा।
चित्रकला, निबंध और कविता प्रतियोगिताओं का भी होगा आयोजन
जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
इनमें चित्रकला, कहानी लेखन, कविता लेखन, निबंध, लघु लेख और फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं शामिल होंगी।
इसके अतिरिक्त क्विज और स्लोगन प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, जनजातीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के विषय में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इन गतिविधियों का उद्देश्य नई पीढ़ी में जनजातीय समाज के योगदान के प्रति सम्मान और जागरूकता विकसित करना है।
सरकारी योजनाओं और जनजातीय कल्याण की जानकारी भी दी जाएगी
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आयोजनों के दौरान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और जनजातीय समाज के हित में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाए।
कार्यक्रमों में जनजातीय समुदायों के कल्याण से संबंधित योजनाओं, विभागीय सुधारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
सामुदायिक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने तथा संबंधित विभागों के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर रहेगा।
इस पहल का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाना है।
जनजातीय नायकों के योगदान को किया जाएगा याद
जनजातीय गौरव दिवस के अंतर्गत भगवान बिरसा मुंडा सहित महान जनजातीय नायकों के योगदान को याद किया जाएगा।
कार्यक्रमों में उनके संघर्ष, बलिदान और समाज के प्रति योगदान पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
मुख्य जनजातीय गौरव दिवस समारोह में पुष्पांजलि कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया जाएगा।
अधिकारियों को दिए समन्वय और तैयारियों के निर्देश
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों की रूपरेखा के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में प्रस्तावित कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय आवश्यक है।
मंत्री ने अधिकारियों से कार्यक्रमों की कार्ययोजना तैयार करने, आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने और जनजातीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने विशेष रूप से 15 नवंबर को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह की तैयारियों पर ध्यान देने के निर्देश दिए।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
जनजातीय गौरव दिवस की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में समाज कल्याण सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अदांकी, अपर सचिव बिक्रम सिंह यादव, निदेशक जनजाति संजय टोलिया सहित विभाग के अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा और आवश्यक व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी आयोजन भारत सरकार के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित किए जाएं।
जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा बढ़ावा
उत्तराखंड में 1 से 18 नवंबर तक आयोजित होने वाले जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक योगदान को सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर होंगे।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष को याद करने के साथ ही जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं और उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
साथ ही सरकारी योजनाओं की जानकारी, सांस्कृतिक कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनजातीय गौरव दिवस 2026 के सभी कार्यक्रम प्रभावी ढंग से आयोजित किए जाएं। प्रदेश में 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर होने वाला मुख्य समारोह इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। सरकार का उद्देश्य जनजातीय समाज की गौरवशाली विरासत को सम्मान देने के साथ उसकी संस्कृति, इतिहास और उपलब्धियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

