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UP MLC Election 2026: Voting on 11 Legislative Council Seats, 152 Candidates in Fray

यूपी एमएलसी चुनाव 2026: विधान परिषद की 11 सीटों पर मतदान, 152 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे 14.81 लाख मतदाता

उत्तर प्रदेश में 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर 72 जिलों में मतदान

लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होना है। इनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों पर कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। उपलब्ध चुनावी विवरण के अनुसार, प्रदेश के 72 जिलों में कुल 14,81,310 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं।

विधान परिषद के इन चुनावों को प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाला मतदान उच्च सदन में प्रतिनिधित्व तय करने के साथ राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के समर्थन का भी संकेत देगा।

मतदान को लेकर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में तैयारियां की गई हैं। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना निर्वाचन प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की जिन 11 सीटों के लिए मतदान निर्धारित है, उनमें पांच सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की हैं, जबकि छह सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ डिवीजन शिक्षक, वाराणसी डिवीजन शिक्षक, आगरा डिवीजन शिक्षक, मेरठ डिवीजन शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद डिवीजन शिक्षक और एक अन्य शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल बताया गया है।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

वहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं।

इन चुनावों की विशेषता यह है कि इनमें सामान्य विधानसभा चुनावों की तरह सभी वयस्क नागरिक मतदान नहीं करते, बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत पात्र स्नातक और शिक्षक ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।

152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में

विधान परिषद की 11 सीटों के लिए कुल 152 प्रत्याशी मैदान में हैं।

इन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं के समर्थन पर निर्भर करेगा।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों की सेवा शर्तें, वेतन, पेंशन, पदोन्नति, शैक्षणिक संसाधन और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित विषय चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

हालांकि, अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशियों की प्राथमिकताएं और स्थानीय मुद्दे भिन्न हो सकते हैं।

72 जिलों में मतदान, तीन जिले चुनाव प्रक्रिया से बाहर

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर शेष 72 जिलों में इन निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत मतदान होना है।

इन जिलों में संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में शामिल मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

मतदान के लिए निर्वाचन अधिकारियों की ओर से निर्धारित केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी हैं।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की पहचान, मतदान की गोपनीयता और निर्वाचन संबंधी नियमों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।

14.81 लाख से अधिक मतदाता करेंगे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए कुल 14,81,310 मतदाता पंजीकृत बताए गए हैं।

इनमें संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के पात्र मतदाता शामिल हैं।

मतदाताओं की भागीदारी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक होगी।

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदान प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होती है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधियों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत एकल संक्रमणीय मत पद्धति से किया जाता है।

इस प्रणाली में मतदाता प्रत्याशियों को अपनी वरीयता के अनुसार क्रम देते हैं।

इसलिए मतगणना की प्रक्रिया भी सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग हो सकती है।

विधान परिषद चुनाव क्यों हैं महत्वपूर्ण?

उत्तर प्रदेश में विधानमंडल के दो सदन हैं। पहला विधानसभा और दूसरा विधान परिषद।

विधान परिषद राज्य का उच्च सदन है। इसके सदस्य विभिन्न निर्वाचन प्रक्रियाओं के माध्यम से चुने जाते हैं और कुछ सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा किया जाता है।

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाने वाले सदस्य शिक्षा जगत तथा संबंधित मतदाता वर्गों की समस्याओं और अपेक्षाओं को सदन में उठाने की भूमिका निभाते हैं।

विधान परिषद राज्य की विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देती है। सदन में विधेयकों, नीतियों और जनहित के विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाती है।

इन 11 सीटों के चुनाव से उच्च सदन में संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व निर्धारित होगा।

राजनीतिक दलों की भी चुनाव पर नजर

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चुनाव राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशियों को मतदाताओं के बीच अपनी प्राथमिकताएं और कार्ययोजनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

इन चुनावों में राजनीतिक दलों से जुड़े प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले में हो सकते हैं।

चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में किन प्रत्याशियों को मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ है।

हालांकि, इन चुनावों के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनावों के जनादेश के समान नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों चुनावों की मतदाता संरचना और निर्वाचन प्रक्रिया अलग होती है।

शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर रहेगा ध्यान

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा, रोजगार के अवसर, युवाओं का भविष्य और कौशल विकास जैसे विषय मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों की समस्याएं, शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति, सेवा संबंधी मांगें और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं।

चुने गए प्रतिनिधियों से अपेक्षा रहती है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं को विधान परिषद में उठाएं और संबंधित विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करें।

शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान बड़ी प्राथमिकता

विधान परिषद चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए मतदान केंद्रों पर निर्वाचन संबंधी व्यवस्थाओं का पालन आवश्यक है।

मतदान प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं की पहचान, मतदान सामग्री की उपलब्धता, मतदान की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था जैसे पहलुओं का विशेष महत्व रहता है।

निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि मतदान प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो और पात्र मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

चुनाव परिणामों से तय होगा उच्च सदन का नया प्रतिनिधित्व

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में 152 प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।

पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुने जाने वाले प्रतिनिधि आगामी कार्यकाल में अपने संबंधित मतदाता वर्गों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

प्रदेश के 72 जिलों में 14.81 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी इन चुनावों को व्यापक बनाती है।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 में 11 सीटों पर होने वाला मतदान प्रदेश के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। अब सभी की नजर मतदाताओं के फैसले और चुनाव परिणामों पर रहेगी, जिनसे यह तय होगा कि उच्च सदन में इन निर्वाचन क्षेत्रों की आवाज कौन बनेगा।

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