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Siddharthnagar Newborn Baby Death: Family Blames Loud DJ Noise During Idol Immersion Procession

सिद्धार्थनगर में दर्दनाक घटना: मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज डीजे की आवाज से नवजात की मौत का आरोप, परिवार में मचा कोहराम

 विजयदशमी की रात डीजे की तेज आवाज और कंपन के बीच नवजात की मौत से परिवार सदमे में, पिता ने बताया—आवाज इतनी तेज थी कि घर का छज्जा और ड्रम तक हिलने लगे

सिद्धार्थनगर, 23 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। विजयदशमी की रात मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज आवाज में बज रहे डीजे के बीच एक नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि विसर्जन जुलूस में बज रहे डीजे की अत्यधिक तेज आवाज और उससे पैदा हुए कंपन के कारण बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी जान चली गई। हालांकि, नवजात की मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।

घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। बच्चे के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने तेज आवाज में डीजे बजाए जाने पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

इस घटना ने धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक जुलूसों के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने, ध्वनि प्रदूषण तथा प्रशासनिक निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विजयदशमी की रात तेज आवाज में बज रहा था डीजे

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थनगर जिले में विजयदशमी के अवसर पर मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान जुलूस में तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा था।

परिजनों का कहना है कि डीजे की आवाज इतनी अधिक थी कि आसपास के मकानों में कंपन महसूस होने लगा। घर में रखी वस्तुएं भी हिलने लगी थीं।

इसी दौरान एक परिवार के नवजात शिशु की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि डीजे की तेज आवाज और कंपन का बच्चे पर गंभीर प्रभाव पड़ा।

घटना के बाद परिवार के सदस्यों में शोक और आक्रोश का माहौल है।

पिता जावेद मनिहार बोले—बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था

नवजात के पिता जावेद मनिहार ने बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी सोमवार शाम को हुई थी। उनके अनुसार, जन्म के बाद बच्चे में किसी प्रकार की बीमारी के लक्षण नहीं थे और वह स्वस्थ था।

पिता का कहना है कि विजयदशमी की रात मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि डीजे से निकलने वाला कंपन इतना अधिक था कि उनके घर का छज्जा और वहां रखा ड्रम तक हिलने लगा।

जावेद मनिहार के मुताबिक, इस दौरान उनके नवजात बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

उन्होंने इस घटना के लिए डीजे की अत्यधिक तेज आवाज को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, उनके आरोप की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय और प्रशासनिक जांच आवश्यक है।

मां सबरून निशा का रो-रोकर बुरा हाल

नवजात की मौत से उसकी मां सबरून निशा गहरे सदमे में हैं। बच्चे को जन्म देने के कुछ ही समय बाद उसकी मौत ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।

सबरून निशा ने बताया कि उनका बच्चा रात में पूरी तरह स्वस्थ था। उनका आरोप है कि डीजे की तेज आवाज के दौरान बच्चे की हालत बिगड़ गई।

मां का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चे को लेकर कई सपने देखे थे, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।

परिवार के अन्य सदस्य भी इस घटना से दुखी हैं। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि बच्चे की मौत का वास्तविक कारण सामने आ सके।

पहले भी प्रशासन को दी गई थी चेतावनी

इस मामले में स्थानीय समाजसेवी उपेंद्र पाण्डेय ने भी ध्वनि प्रदूषण और तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने बताया कि कस्बे के जागरूक नागरिकों ने पहले ही जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर डीजे की तेज आवाज से होने वाली परेशानियों के संबंध में आगाह किया था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अत्यधिक तेज आवाज में डीजे बजाए जाने से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को परेशानी हो सकती है।

समाजसेवी उपेंद्र पाण्डेय के अनुसार, प्रशासन को इस प्रकार की शिकायतों को गंभीरता से लेकर समय रहते प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

हालांकि, पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ध्वनि प्रदूषण और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नवजात की मौत के बाद सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन कराने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक तेज आवाज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने, नींद में बाधा, तनाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

नवजात शिशु और छोटे बच्चे तेज आवाज के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे में उनके आसपास अत्यधिक शोर से बचाव के उपाय आवश्यक हैं।

हालांकि, किसी विशेष घटना में तेज आवाज को मृत्यु का कारण मानने के लिए चिकित्सकीय साक्ष्य जरूरी होते हैं।

सिद्धार्थनगर की इस घटना में भी यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या डीजे की आवाज से उसका कोई चिकित्सकीय संबंध था।

धार्मिक आयोजनों में नियमों के पालन की जरूरत

धार्मिक आयोजनों और विसर्जन जुलूसों के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित नियमों के अंतर्गत किया जाना आवश्यक है।

भारत में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए शोर की निर्धारित सीमाएं लागू हैं। लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि प्रणालियों के उपयोग के लिए भी नियम और प्रतिबंध निर्धारित किए गए हैं।

इन नियमों का उद्देश्य धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ आम नागरिकों के स्वास्थ्य तथा शांतिपूर्ण वातावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आयोजनों के दौरान डीजे की आवाज निर्धारित सीमा में रखी जानी चाहिए और प्रशासन को नियमों का पालन सुनिश्चित कराना चाहिए।

नवजात की मौत के कारणों की जांच जरूरी

सिद्धार्थनगर की इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नवजात शिशु की मौत के वास्तविक कारण का है।

परिजनों ने डीजे की तेज आवाज और कंपन को मौत के लिए जिम्मेदार बताया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसकी चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में मृत्यु के कारणों का निर्धारण संबंधित चिकित्सकीय जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकता है।

इसके साथ ही यह जांच भी महत्वपूर्ण होगी कि मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे संचालन में निर्धारित ध्वनि संबंधी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

घटना से परिवार में मातम, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा

नवजात की मौत ने पूरे परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। माता-पिता अपने बच्चे की मौत के कारणों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

यह मामला सार्वजनिक आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण के प्रति संवेदनशीलता और सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

सिद्धार्थनगर में नवजात शिशु की मौत एक दुखद घटना है। परिवार ने अत्यधिक तेज डीजे की आवाज को इसका कारण बताया है, लेकिन वास्तविक कारण की पुष्टि अभी बाकी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के साथ ध्वनि प्रदूषण के नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है, ताकि सार्वजनिक आयोजनों के दौरान नागरिकों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा बनी रहे।

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