वाल्मीकि प्रकटोत्सव पर सीएम धामी का बड़ा ऐलान, उत्तराखंड के पर्यावरण मित्रों का जल्द बढ़ेगा मानदेय
देहरादून में महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव की शोभायात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। पर्यावरण मित्रों के मानदेय में वृद्धि के लिए जल्द बैठक बुलाने का दिया आश्वासन, सामाजिक समरसता और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण की योजनाओं पर भी किया विस्तार से संबोधन।
देहरादून, 26 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून नगर निगम में महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव के अवसर पर आयोजित शोभायात्रा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत पर्यावरण मित्रों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उनके मानदेय में जल्द वृद्धि की जाएगी। इसके लिए शीघ्र ही संबंधित अधिकारियों की बैठक आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए उनके जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसे महान महाकाव्य के माध्यम से पूरी दुनिया को भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और मानवीय मूल्यों से परिचित कराया।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक समानता, बंधुत्व, सम्मान और समरसता को समाज की मजबूती का आधार बताते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
पर्यावरण मित्रों का मानदेय जल्द बढ़ाएगी सरकार
महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्यावरण मित्रों के मानदेय में वृद्धि का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत पर्यावरण मित्रों के मानदेय को बढ़ाने के लिए जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस संबंध में यथाशीघ्र बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें मानदेय वृद्धि से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
पर्यावरण मित्र नगरों और अन्य क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सार्वजनिक स्थानों की सफाई, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण होता है।
मुख्यमंत्री की घोषणा से प्रदेश के पर्यावरण मित्रों में मानदेय बढ़ने की उम्मीद जगी है।
हालांकि मानदेय में कितनी वृद्धि होगी और नई दरें कब से लागू होंगी, इसकी जानकारी अभी घोषित नहीं की गई है।
महर्षि वाल्मीकि के जीवन से मिलती है प्रेरणा: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन ज्ञान, कर्म और समाज के प्रति समर्पण का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना करके भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन से पूरी दुनिया को परिचित कराया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का जीवन यह सिखाता है कि अच्छे विचारों और कर्मों से कोई भी व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान, कर्म और समाज के प्रति योगदान से होती है।
महर्षि वाल्मीकि ने ऐसे समाज के निर्माण की प्रेरणा दी, जहां भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके विचार आज भी समाज को समानता और मानवीय गरिमा का सम्मान करने की प्रेरणा देते हैं।
रामायण में सत्य, धर्म और कर्तव्य का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामायण में वर्णित मानवीय मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महाकाव्य सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य के महत्व को समझाता है।
उन्होंने कहा कि रामायण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आदर्श आचरण और मानवीय मूल्यों का संदेश देने वाला महाकाव्य भी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, रामायण प्रेम, समानता, बंधुत्व और मानवीय गरिमा का सम्मान करना सिखाती है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके विचारों, कर्मों और समर्पण के आधार पर होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक परंपरा समाज में प्रेम, सद्भाव और समरसता बनाए रखने का संदेश देती रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा सम्मान
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे विकास कार्यों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हुए विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि देश में इतिहास को पहचानने, सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने और परंपराओं को सम्मान देने का नया वातावरण बना है।
उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी आवश्यक है।
श्रीराम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि को मिला सम्मान
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर परिसर से जुड़े सांस्कृतिक स्वरूप का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को स्थान दिया जाना सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े इन महान व्यक्तित्वों का सम्मान समाज में समानता और समावेशिता का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का योगदान भारतीय संस्कृति और साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उनकी शिक्षाएं समाज को एकजुट रहने और सभी वर्गों का सम्मान करने की प्रेरणा देती हैं।
अयोध्या हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है।
अयोध्या स्थित हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
मुख्यमंत्री ने इसे महर्षि वाल्मीकि के महान योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को उचित सम्मान देना समाज में सकारात्मक संदेश देता है।
गरीबों और वंचित वर्गों के कल्याण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, वंचितों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को आवास, स्वास्थ्य, पेयजल, रसोई गैस और खाद्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों परिवारों को लाभ मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान अवसर और सम्मान उपलब्ध कराकर ही देश को विकसित और सशक्त बनाया जा सकता है।
अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड सरकार की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा एक से बारहवीं तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।
इन योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है।
राज्य सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
15 निःशुल्क छात्रावास और पांच आवासीय विद्यालय संचालित
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राज्य में 15 निःशुल्क छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त पांच आवासीय विद्यालय और तीन औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई भी संचालित किए जा रहे हैं।
इन संस्थानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा, आवास और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए ऐसी सुविधाएं विशेष रूप से उपयोगी हैं।
शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है।
इसका उद्देश्य युवाओं को सरकारी नौकरियों और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर मिलने से समाज के सभी वर्गों की भागीदारी बढ़ेगी।
अटल आवास योजना के तहत ₹1.20 लाख की सहायता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने अटल आवास योजना को पुनः प्रारंभ किया है।
इस योजना के अंतर्गत आवासहीन अनुसूचित वर्ग के पात्र परिवारों को घर बनाने के लिए एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता देने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है।
आवास सुविधा से परिवारों की जीवन परिस्थितियों में सुधार लाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
योजना का लाभ निर्धारित पात्रता और संबंधित विभागीय नियमों के अनुसार दिया जाता है।
अंतरजातीय विवाह पर ₹50 हजार की प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति के युवक या युवती से अंतरजातीय विवाह करने पर निर्धारित पात्रता के अनुसार 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।
इस योजना का उद्देश्य सामाजिक समानता और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में भेदभाव समाप्त करने और सभी वर्गों को सम्मान देने के प्रयास निरंतर जारी रहने चाहिए।
बेटियों के विवाह के लिए भी ₹50 हजार की सहायता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के पात्र परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए भी राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है।
इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं, बेटियों और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सामाजिक समरसता और समान अवसर का दिया संदेश
महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज में समानता, सम्मान और भाईचारे का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन बताता है कि ज्ञान और कर्म के माध्यम से व्यक्ति समाज को नई दिशा दे सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है, जब उसके सभी वर्गों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के सशक्तीकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
पर्यावरण मित्रों की भूमिका को मिला महत्व
मुख्यमंत्री की मानदेय वृद्धि संबंधी घोषणा कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।
पर्यावरण मित्र शहरों और सार्वजनिक संस्थानों की स्वच्छता व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उनका कार्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने से सीधे जुड़ा हुआ है।
मानदेय बढ़ाने के लिए बैठक बुलाने की घोषणा से इस विषय पर सरकारी स्तर पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि अंतिम निर्णय के लिए संबंधित विभागों की बैठक, वित्तीय व्यवस्था और आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां महत्वपूर्ण होंगी।
मानदेय वृद्धि के आदेश का इंतजार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्यावरण मित्रों का मानदेय जल्द बढ़ाने की बात कही है, लेकिन अभी नई मानदेय दरों की घोषणा नहीं हुई है।
यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि बढ़ोतरी किस तारीख से लागू होगी और किन विभागों के कितने कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।
इन विषयों पर स्थिति संबंधित विभागों की बैठक और सरकारी आदेश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
फिलहाल मुख्यमंत्री की घोषणा को पर्यावरण मित्रों के लिए महत्वपूर्ण आश्वासन माना जा रहा है।
वाल्मीकि प्रकटोत्सव पर विकास और सामाजिक कल्याण का संदेश
देहरादून नगर निगम में आयोजित महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और रामायण के मानवीय संदेशों को याद करते हुए समाज में समानता तथा सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में पर्यावरण मित्रों के मानदेय में वृद्धि का आश्वासन सबसे महत्वपूर्ण घोषणा के रूप में सामने आया।
कुल मिलाकर, देहरादून में महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के पर्यावरण मित्रों का मानदेय जल्द बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने इसके लिए शीघ्र बैठक आयोजित करने की बात कही। साथ ही महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को याद करते हुए सामाजिक समानता, सांस्कृतिक विरासत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं पर प्रकाश डाला। अब पर्यावरण मित्रों के मानदेय में वास्तविक बढ़ोतरी और उसके लागू होने की तारीख से जुड़े सरकारी निर्णय का इंतजार रहेगा।

