Gold-Silver Price: सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, ₹2 लाख के नीचे फिसली चांदी; रिकॉर्ड हाई से कितनी हुई सस्ती?
Gold Silver Rate Today 26 October 2026: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे बना हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत लगभग 53 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है।
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026। सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सर्राफा बाजार से महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से कीमती धातुओं की कीमतों में जारी गिरावट सोमवार को भी देखने को मिली। खासतौर पर चांदी के भाव में आई कमजोरी ने निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान खींचा है।
सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स (MCX) पर चांदी के वायदा भाव में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही चांदी की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे बनी रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों पर दबाव दिखाई दिया। उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के अनुसार, चांदी लगभग 53 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई, जिसे नवंबर 2025 के बाद का निचला स्तर बताया गया है।
सोने की कीमतों में भी हाल के दिनों में कमजोरी का रुख रहा है। हालांकि अलग-अलग बाजारों, वायदा अनुबंधों और शहरों में सोने-चांदी के भाव अलग हो सकते हैं।
चांदी की कीमत में लगातार गिरावट
पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद चांदी के भाव में आई गिरावट सोमवार को भी जारी रही।
एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।
चांदी की कीमत में गिरावट के कारण उन निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है, जिन्होंने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी।
वहीं ऐसे ग्राहक जो आभूषण, बर्तन या अन्य उपयोग के लिए चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए कीमतों में कमी महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि बाजार में गिरावट का सिलसिला कब तक जारी रहेगा, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।
रिकॉर्ड हाई से कितनी सस्ती हुई चांदी?
चांदी के भाव में आई गिरावट को समझने के लिए उसके हालिया उच्चतम स्तर की तुलना वर्तमान कीमत से करना जरूरी है।
बाजार रिपोर्ट के अनुसार, चांदी अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुकी है।
सोमवार को भी कीमत में कमजोरी आने से उच्चतम स्तर और मौजूदा भाव के बीच का अंतर बढ़ गया।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में चांदी के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर और सोमवार के सटीक वायदा भाव की पुष्टि नहीं है। इसलिए दोनों के बीच रुपये में अंतर बताना उचित नहीं होगा।
चांदी की कीमत में वास्तविक गिरावट की गणना संबंधित वायदा अनुबंध के उच्चतम और वर्तमान भाव के आधार पर की जानी चाहिए।
उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु का उच्चतम भाव 2.20 लाख रुपये और वर्तमान भाव 1.95 लाख रुपये हो, तो अंतर 25 हजार रुपये होगा। यह केवल गणना समझाने का उदाहरण है, चांदी का सत्यापित बाजार भाव नहीं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 53 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची चांदी
भारतीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगभग 53 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई।
इसे नवंबर 2025 के बाद का निचला स्तर बताया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का असर भारतीय वायदा बाजार पर भी पड़ सकता है।
हालांकि भारत में चांदी की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर नहीं करती।
रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात संबंधी लागत, कर तथा घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट और भारतीय बाजार में गिरावट का अनुपात हमेशा समान नहीं होता।
सोने की कीमतों पर भी दबाव
चांदी के साथ सोने की कीमतों में भी हाल के दिनों में कमजोरी का रुख देखने को मिला है।
सोना आमतौर पर निवेश और आभूषण दोनों के लिए महत्वपूर्ण कीमती धातु माना जाता है।
भारतीय बाजार में शादी-विवाह, त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों के दौरान सोने की मांग बढ़ सकती है।
लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों के रुख में बदलाव के कारण सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट दोनों संभव हैं।
सोमवार के लिए सोने का कोई एक निश्चित खुदरा भाव बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि कीमत शहर, शुद्धता और बाजार के अनुसार अलग-अलग होती है।
24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के भाव में भी अंतर होता है।
इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा सर्राफा भाव और संबंधित दुकान का अंतिम बिल अवश्य देखना चाहिए।
सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आती है?
सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव के पीछे कई आर्थिक और कारोबारी कारण हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की उम्मीदों में बदलाव, निवेशकों की मुनाफावसूली और औद्योगिक मांग से जुड़े संकेत कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित कर सकते हैं।
सोना अक्सर सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में देखा जाता है।
वहीं चांदी का उपयोग निवेश और आभूषणों के अलावा उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
इस कारण चांदी की कीमतों पर औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक विकास की उम्मीदों का भी प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि सोमवार की गिरावट के पीछे कौन-सा कारण सबसे अधिक जिम्मेदार रहा, इसकी पुष्टि उपलब्ध बाजार विवरण से नहीं होती।
चांदी की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव क्यों?
चांदी की कीमतों में कई बार सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
इसका एक कारण चांदी की दोहरी भूमिका है।
चांदी एक कीमती धातु होने के साथ औद्योगिक उपयोग की वस्तु भी है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सौर ऊर्जा से जुड़े उत्पादों और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का उपयोग किया जाता है।
औद्योगिक मांग में बदलाव से इसकी कीमत प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा वायदा बाजार में निवेशकों की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय संकेत भी भाव में तेज बदलाव ला सकते हैं।
इसलिए चांदी में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार के जोखिम को समझना जरूरी है।
एमसीएक्स पर चांदी का भाव और सर्राफा बाजार की कीमत अलग क्यों?
एमसीएक्स पर दिखाई देने वाली कीमत और स्थानीय सर्राफा बाजार में मिलने वाली चांदी का भाव अलग हो सकता है।
एमसीएक्स पर चांदी के विभिन्न वायदा अनुबंधों में कारोबार होता है।
इन अनुबंधों की कीमत संबंधित समाप्ति अवधि और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
दूसरी ओर स्थानीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में कर, परिवहन, कारोबार संबंधी लागत और विक्रेता का मार्जिन शामिल हो सकता है।
इसलिए एमसीएक्स पर चांदी का भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे होने का अर्थ यह नहीं है कि देश के हर शहर में ग्राहक को उसी दर पर चांदी मिल जाएगी।
खुदरा खरीदारी के लिए स्थानीय बाजार का अंतिम भाव जानना आवश्यक है।
क्या चांदी खरीदने का सही समय है?
चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद खरीदारों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब खरीदारी करनी चाहिए।
लेकिन केवल कीमतों में गिरावट को खरीदारी का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
यदि कोई व्यक्ति घरेलू उपयोग या किसी निश्चित आवश्यकता के लिए चांदी खरीदना चाहता है, तो वह अपने बजट और जरूरत के अनुसार निर्णय ले सकता है।
वहीं निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।
कीमती धातुओं में निवेश करते समय अल्पकालिक बाजार गतिविधियों के आधार पर जल्दबाजी में निर्णय लेना नुकसानदायक हो सकता है।
त्योहारों और शादी के सीजन में कीमतों पर नजर
भारत में सोना और चांदी खरीदने की परंपरा लंबे समय से रही है।
धनतेरस, दिवाली, अक्षय तृतीया और विवाह समारोहों के दौरान इन धातुओं की खरीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है।
ऐसे अवसरों पर ग्राहक आभूषणों, सिक्कों और अन्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।
कीमतों में गिरावट आने से कुछ ग्राहकों की खरीदारी में रुचि बढ़ सकती है।
हालांकि मांग बढ़ने से कीमतें निश्चित रूप से ऊपर जाएंगी, ऐसा कहना संभव नहीं है।
बाजार में घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सोना खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सोने के आभूषण खरीदते समय उनकी शुद्धता और हॉलमार्किंग की जांच करना महत्वपूर्ण है।
ग्राहकों को आभूषण की शुद्धता, वजन, मेकिंग चार्ज और लागू करों की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
बिल में इन सभी मदों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
इसी तरह चांदी खरीदते समय भी उसकी शुद्धता और वजन की पुष्टि करना आवश्यक है।
केवल कम कीमत देखकर खरीदारी करने के बजाय उत्पाद की गुणवत्ता और विक्रेता की विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोना और चांदी दोनों में निवेश करने वाले लोगों के लिए मौजूदा गिरावट बाजार की अस्थिरता का संकेत है।
जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की है, उनके निवेश का बाजार मूल्य घट सकता है।
वहीं नए निवेशकों को कम कीमतों पर खरीदारी का अवसर दिखाई दे सकता है।
लेकिन भविष्य में कीमतें और गिरेंगी या वापस बढ़ेंगी, इसका निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
निवेश का फैसला व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, समयावधि और जोखिम सहन करने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।
आगे सोना-चांदी की कीमतों का क्या होगा?
आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों पर घरेलू तथा वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों का प्रभाव पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाएं, औद्योगिक मांग और निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
भारतीय बाजार में रुपये की विनिमय दर और स्थानीय मांग भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे में बाजार के अगले रुख को लेकर कोई निश्चित भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
खरीदारों और निवेशकों को ताजा बाजार भाव तथा विश्वसनीय कारोबारी आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट से ग्राहकों की बढ़ी दिलचस्पी
सोमवार, 26 अक्टूबर को सोना और चांदी की कीमतों में जारी कमजोरी के बीच खासतौर पर चांदी का भाव चर्चा में बना हुआ है।
एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी लगभग 53 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
कीमतों में इस बदलाव पर आभूषण खरीदारों, कारोबारियों और निवेशकों की नजर बनी हुई है।
कुल मिलाकर, सोना-चांदी के बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट सोमवार को भी देखने को मिली। खासतौर पर चांदी की कीमतों में कमजोरी ने बाजार का ध्यान खींचा है। हालांकि ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि वायदा बाजार और स्थानीय सर्राफा बाजार की कीमतें अलग हो सकती हैं। इसलिए सोना या चांदी खरीदने से पहले ताजा भाव, शुद्धता, कर और अन्य शुल्कों की जानकारी लेकर ही निर्णय करना बेहतर होगा।

