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Uttarakhand Madrasa Sunday Holiday 2026: CM Dhami Announces New Rules

उत्तराखंड में मदरसों को लेकर धामी सरकार का बड़ा फैसला, अब शुक्रवार नहीं रविवार को होगी छुट्टी, 76 मदरसों को मिली स्कूल की मान्यता

उत्तराखंड मदरसा नई शिक्षा व्यवस्था 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में रविवार को साप्ताहिक अवकाश लागू करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रदेश में अब तक 76 मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है, जबकि 114 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

देहरादून, 21 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही इन शिक्षण संस्थानों को शिक्षा विभाग और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सभी शैक्षिक नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

राज्य सरकार के अनुसार इस निर्णय का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में समान शैक्षिक मानकों को लागू करना और विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में समानता लाने से बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने और भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

शुक्रवार की जगह रविवार को होगा साप्ताहिक अवकाश

धामी सरकार के नए निर्देशों के अनुसार उत्तराखंड में जिन मदरसों को शिक्षा विभाग से स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है, उनमें अब साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार के बजाय रविवार को होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी शिक्षण संस्थानों को शिक्षा विभाग की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही संचालित किया जाएगा।

इस निर्णय के तहत मान्यता प्राप्त मदरसों में शैक्षिक गतिविधियों, साप्ताहिक अवकाश और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में निर्धारित नियम लागू होंगे।

हालांकि यह व्यवस्था विशेष रूप से उन मदरसों पर लागू होगी, जिन्हें नई प्रणाली के अंतर्गत स्कूल के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड समाप्त, नई शिक्षा व्यवस्था लागू

राज्य सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड की व्यवस्था की गई है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी सहित विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुसार संचालित करने की व्यवस्था की गई है।

सरकार का उद्देश्य इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम और बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को भी अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों के समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

452 मदरसों को पहले मिली थी मान्यता, अब 76 बने स्कूल

सरकारी जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में पूर्व में मदरसा बोर्ड से कुल 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद संबंधित शिक्षण संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा मान्यता के लिए आवेदन करना है।

अब तक कुल 76 मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता प्रदान की जा चुकी है, जबकि 114 संस्थानों के आवेदन शिक्षा विभाग में प्रक्रियाधीन हैं।

सरकार का कहना है कि निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को ही आवश्यक मान्यता प्रदान की जाएगी।

चार जिलों में 76 मदरसों को मिली स्कूल की मान्यता

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि प्रदेश के चार जिलों में अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है।

जिलावार मान्यता प्राप्त संस्थानों की संख्या इस प्रकार है:

  • हरिद्वार: 44 संस्थान
  • ऊधमसिंह नगर: 24 संस्थान
  • देहरादून: 6 संस्थान
  • नैनीताल: 2 संस्थान

डॉ. गांधी के अनुसार मान्यता प्राप्त सभी शिक्षण संस्थानों को शिक्षा विभाग और प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

इन नियमों में साप्ताहिक अवकाश, शैक्षिक संचालन और आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं शामिल हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना आवश्यक मान्यता और अनुमति के किसी भी संस्थान का संचालन नहीं किया जा सकेगा।

250 अवैध मदरसों को पहले ही किया जा चुका है सील

उत्तराखंड अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि राज्य सरकार ने पहले चरण में 250 अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया था।

उनके अनुसार ये संस्थान मदरसा बोर्ड से भी पंजीकृत नहीं थे।

विभागीय जानकारी के मुताबिक कुछ संस्थानों में बाहरी राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाए जाने की बात भी सामने आई थी।

सरकार का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षण संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना वैधानिक अनुमति के शिक्षण संस्थानों का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

तुष्टिकरण नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हमारी प्राथमिकता: मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तुष्टिकरण आधारित शिक्षा व्यवस्था के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि जब मदरसे शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त स्कूलों के रूप में संचालित हो रहे हैं, तो उन पर शिक्षा विभाग के निर्धारित नियम भी समान रूप से लागू होंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा निर्धारित शैक्षिक मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा पर सरकार का जोर

धामी सरकार का कहना है कि प्रदेश के सभी बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार का मानना है कि आधुनिक शिक्षा और निर्धारित शैक्षिक मानकों के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है।

इसके साथ ही सरकार अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त संस्थानों को संबंधित शिक्षा नियमों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना होगा।

नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को नहीं मिलेगी संचालन की अनुमति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में शिक्षण संस्थानों के संचालन के लिए निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य से किसी प्रकार का समझौता न हो।

उन्होंने कहा कि नियमों की अवहेलना करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राज्य सरकार के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उत्तराखंड के प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा देने का संकल्प

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड का प्रत्येक बच्चा आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करे, यह राज्य सरकार का संकल्प है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला भी है।

सरकार चाहती है कि सभी समुदायों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक अवसर प्राप्त हों और वे अपनी प्रतिभा के आधार पर भविष्य में आगे बढ़ सकें।

उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव

उत्तराखंड में स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश लागू करने का निर्णय राज्य की अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नई व्यवस्था में अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है और 114 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

इस फैसले के बाद संबंधित संस्थानों को शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी व्यवस्थाएं संचालित करनी होंगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोहराया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी बच्चों को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

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